Monday, 12 March 2012

Uphaar

सूरज की एक किरण
चाँद की मुट्ठी भर ठंडक
थोड़ी सी पत्तियों की सरसराहट
अंजुरी भर चिड़ियों की चहचहाहट
आकाश की मुट्ठी भर महानता
धरती की थोड़ी सी संवेदना
सागर का लोटा भर गीलापन
एक चुटकी मिटटी की खुशबू
पेड़ की झोला भर हरियाली
दूब की एक पाव नरमाहट
एक ताल जलप्रपात का संगीत
पोटली भर हवा की शीतलता
इन्द्रधनुष के सात रंग
डिब्बा भर तारों की चमक
एक कटोरी उषा की ताजगी
झोला भर रात की शान्ति
और
ढेर सारा परम पिता का ओजस्व
चमकीले कागज़ में लपेटकर 
तुम्हें उपहार देने आई हूँ.

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